Wednesday, September 23, 2020

धर्म और राजनिति

  
                                                                                              सत्तारूढ़ राजनीति बहुत पौरुष-केन्द्रित हो चुकी है और उसके द्वारा हिन्दू धर्म के जिस अप्रामाणिक लेकिन कॉरपोरेट क़िस्म के संस्करण - हिन्दुत्व - को पाला-पोसा-बढ़ाया जा रहा है उसमें वे सभी तत्व हैं जो स्त्रियों को समाज में समान अधिकार देने के विरुद्ध और पितृसत्ता क़ायम रखने के पक्ष में सक्रिय होंगे. इसका आशय यह है कि स्त्री-विमर्श को हिन्दुत्व का सामना भी करना पड़ेगा. और तो और वे भूल रहें है कि अहिंसा में पूरा भरोसा करनेवाले गांधीजी भी इसी देश के थे। जिनके साथ यहाँ की औरते चल रही है। रास्ता कठिण है पर नामुम्किन कुछ भी नहीं।
 
हमारी हालत यह है कि हमें कोरोना महामारी से लेकर अन्य अनेक प्रकार के भय घेरते जा रहे हैं और राज्य जिन्हें कर सकता है उन्हें दूर करने के बजाय स्वयं भय की वजह बन रहा है. हम लोकतंत्र से भय खाने लगे हैं क्योंकि वह बहुसंख्यकतावादी बनता जा रहा है. हम अदालतों से भय खा रहे हैं कि वे राजनीति से इस क़दर प्रभावित हो रही हैं कि उन पर अपने बुनियादी अधिकारों की रक्षा करने के लिए भरोसा नहीं कर सकते. हम धर्मों से भय खा रहे हैं कि वे हमें शांति और समाधान देने के बजाय इन दिनों लगातार हिंसक हो रहे हैं. वे आपसदारी को ज़्यादा और भेदभाव को कम करने के बजाय पहले को कम और दूसरे को ज्यादा कर रहे हैं. हम संवैधानिक संस्थाओं से भय खा रहे हैं क्योंकि वे संविधान के प्रति नहीं, सत्ता के प्रति वफादार होती जा रही है. हम मीडिया से, उसके बड़े भाग से भय खा रहे हैं क्योंकि वह चौबीसों घण्टे घृणा, भेदभाव फैला रहा है. हम अपने मध्य वर्ग से भयातुर हैं कि वह सचाई के बजाय तरह-तरह के झूठों को सच मानकर भक्ति और अन्धानुकरण में रत हैं. कुल मिलाकर, हर दिशा से डरावने विद्रूप हमें घेरे हुए हैं.

इस समय न डरना कठिन ज़रूर है पर असम्भव नहीं है. गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को जेल में बरसों-महीनों क़ैद कर एक आतयायी औपनिवेशिक सत्ता ने डराने की कोशिश की. पर हजार तकलीफे उठाकर -  कस्तूरबा और उनके प्रिय सचिव दोनों का देहावसान उन सभी के जेल में रहते हुए हुआ था - वे डरे नहीं. 

हम आज ऐसी भयावह स्थिति में हैं जहां हत्यारे-हिंसक-बलात्कारी राजनीति और सत्ता दोनों से प्रश्रय पा रहे हैं. समय की गति तेज़ है और परिवर्तन भी दूर नहीं हो सकता. डरे हुए लोग, खौफ़ के मारे समूह, परिवर्तन नहीं ला सकते. हमें किसी नायक की प्रतीक्षा नहीं करना चाहिये. अपने डर को दूरकर सर्जनात्मक और अहिंसक ढंग से निर्भय होकर हम जहां भी हैं इस अंधेरे के विरुद्ध एक-एक दीपशिखा जलाना चाहिये. जो इतने भयावह समय में निर्भय है वह, कहीं न कहीं, अपराजेय भी है. हमारी परम्परा यही कहती है. निराशा का एक कर्तव्य निर्भय बनाना भी है. हो सकना चाहिये.

यह अनदेखा नहीं जाना चाहिये कि इस समय राजनीति, विशेषतः सत्तारूढ़ राजनीति बहुत पौरुष-केन्द्रित हो चुकी है और उसके द्वारा हिन्दू धर्म के जिस अप्रामाणिक लेकिन कॉरपोरेट क़िस्म के संस्करण - हिन्दुत्व - को पाला-पोसा-बढ़ाया जा रहा है उसमें वे सभी तत्व हैं जो स्त्रियों को समाज में समान अधिकार देने के विरुद्ध और पितृसत्ता क़ायम रखने के पक्ष में सक्रिय होंगे. इसका आशय यह है कि स्त्री-विमर्श को हिन्दुत्व का सामना भी करना पड़ेगा. चूंकि यह हिन्दुत्व धर्म कम, राजनीति अधिक है इसलिए यह विमर्श बिना गहरे राजनैतिक बोध के प्रामाणिक और सार्थक नहीं हो पायेगा. इसे भी नज़रन्दाज़ नहीं किया जा सकता कि गोदी मीडिया भी कुल मिलाकर क़िस्म-क़िस्म की रूढ़िवादिता को ही पोस और प्रसारित कर रहा है. इसलिए संघर्ष कई स्तरों पर एक साथ होगा. और हम औरतें ना उनसे डरेंगी, हमेशा अपना हौसला कायम रखते हुये हम मिलजुलकर हिंदुत्व का विरोध करती रहेंगी.

By 
डॉ. घपेश पुंडलिकराव ढवळे 
      8600044560
      ghapesh84@gmail.com

Friday, August 21, 2020

*इस्मत चुगताई *

जन्म: 21 अगस्त 1915   निधन: 24 अक्टूबर 1991

इस्मत चुगताई  इनका जन्म 21 अगस्त 1915 उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ। इस्मत चुगताई जी को ‘इस्मत आपा’ के नाम से भी जाना जाता है। वे उर्दू साहित्य की सर्वाधिक विवादास्पद और सर्वप्रमुख लेखिका थीं, जिन्होंने महिलाओं के सवालों को नए सिरे से उठाया। उन्होंने निम्न मध्यवर्गीय मुस्लिम तबक़ें की दबी-कुचली लेकिन जवान होती लड़कियों की मनोदशा को उर्दू कहानियों व उपन्यासों में पूरी सच्चाई से बयान किया है। वे अपनी 'लिहाफ' कहानी के कारण खासी मशहूर हुइ'। 1941 में लिखी गई इस कहानी में उन्होंने महिलाओं के बीच समलैंगिकता के मुद्दे को उठाया था। उस दौर में किसी महिला के लिए यह कहानी लिखना एक दुस्साहस का काम था। इस्मत को इस दुस्साहस की कीमत अश्लीलता को लेकर लगाए गए इल्जाम और मुक़दमे के रूप में चुकानी पड़ी।
उन्होंने आज से करीब 70 साल पहले पुरुषप्रधान समाज में स्त्रियों के मुद्दों को स्त्रियों के नजरिए से कहीं चुटीले और कहीं संजीदा ढंग से पेश करने का जोखिम उठाया। उनके अफसानों में औरत अपने अस्तित्व की लड़ाई से जुड़े मुद्दे उठाती है। साहित्य तथा समाज में चल रहे स्त्री विमर्श को उन्होंने आज से 70 साल पहले ही प्रमुखता दी थी। इससे पता चलता है कि उनकी सोच अपने समय से कितनी आगे थी। उन्होंने अपनी कहानियों में स्त्री चरित्रों को बेहद संजीदगी से उभारा और इसी कारण उनके पात्र जिंदगी के बेहद करीब नजर आते हैं।

स्त्रीयों के सवालों के साथ ही उन्होंने समाज की कुरीतियों, व्यवस्थाओं और अन्य पात्रों को भी बखूबी पेश किया। उन्होंने ठेठ मुहावरेदार गंगा जमुनी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे हिंदी उर्दू की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता। उनका भाषा प्रवाह अद्भुत है और इसने उनकी रचनाओं को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्त्रियों को उनकी अपनी जुबान के साथ अदब में पेश किया।

उन्होंने अनेक चलचित्रों की पटकथा लिखी और जुगनू में अभिनय भी किया। उनकी पहली फिल्म "छेड़-छाड़" 1943 में आई थी। वे कुल 13 फिल्मों से जुड़ी रहीं। उनकी आख़िरी फ़िल्म "गर्म हवा" (1973) को कई पुरस्कार मिले।  

आज भी उनका साहित्य उसी सिरे से महत्वपूर्ण महसूस होता है। आज अगर इस्मतआपा जिंदा होती तो भारत में महिलाओंकी स्थिती देख उन्होंने उसपर अपनी कलम से आवाज उठाई होती|

#IsmatChugtai
By
Dr Ghapesh Pundalikrao dhawale
     Ghapesh, 84@gmail.com
      M. 8600044560

Tuesday, August 18, 2020

बुद्ध म्हनजे????


बुद्ध म्हनजे जगण्याची कला ,आत्मवीश्वास, समता,मैत्री, ज्ञानाचा महासागर, बुद्धांएवढा बुद्धिमान, प्रगल्भ, परिपूर्ण माणूस जगाने आजवर पाहिलेला नाही. बुद्धांच्या सामर्थ्याचा एक थेंब माझ्याकडे असता, तरी खूप झालेfc असते! एवढा थोर तत्त्वचिंतक कोणीच आजवर बघितला नाही. असा शिक्षक यापूर्वी कधी होऊन गेला नाही. काय सामर्थ्य होते पाहा. जुलमी ब्राह्मणांच्या सत्तेसमोरही हा माणूस वाकला नाही. उभा राहिला. तेवत राहिला…"

हे कोण म्हणतंय? 
साक्षात स्वामी विवेकानंद. 
 विवेकानंद १९०० मध्ये तथागत गौतम बुद्धांविषयी कॅलिफोर्नियात बोलत होते. 

भारताची जगभरातली खरी ओळख आजही 'बुद्धांचा देश' हीच आहे. भलेही त्यांचे जन्मगाव असणारे लुंबिनी आता नेपाळमध्ये असेल, पण बुद्ध आपले आणि आपण सारे बुद्धांचे. 

'बुद्धांशी तुलना होईल, असा एकही माणूस नंतर जन्मलाच नाही', असे आचार्य रजनीशांनी म्हणावे! 

बुद्ध थोर होतेच, पण बुद्धांची खरी थोरवी अशी की, आपण प्रेषित असल्याचा दावा त्यांनी कधी केला नाही.पण, बुद्ध हे या इतरांप्रमाणे प्रेषित नव्हते. स्वतःला परमेश्वर मानत नव्हते. मला सगळं जगणं समजलंय, असा त्यांचा दावा नव्हता. मीच अंतिम आहे, असे बुद्ध कधीच म्हणाले नाहीत. डॉ. आ. ह. साळुंखे म्हणतात त्याप्रमाणे, "अन्य धर्मसंस्थापकांनी लोकांना कर्मकांडाची चाकोरी दिली. त्या चाकोरीने बांधून टाकले. तथागतांचा धम्म ही विचारांची चाकोरीबद्ध मांडणी नव्हती. चाकोरी तोडून मुक्त करणारा धर्म बुद्धांनी सांगितला."

'प्रत्येकामध्ये पौर्णिमेच्या चंद्राप्रमाणे पूर्णत्व दडलेले आहेच',तो प्रभाव बुद्धांचाच तर होता. तुम्ही सगळं जग ओळखलं, पण स्वतःला ओळखलं नाही. म्हणून तर स्वतःला शरण जा, असे तथागत म्हणाले. 'बुद्धं सरणं गच्छामि' म्हणजे अन्य काही नाही. स्वतःला शरण जा, हाच त्याचा अर्थ. "कोणी काही सांगेल, म्हणून विश्वास ठेऊ नका. उद्या मीही काही सांगेल. म्हणून ते अंतिम मानू नका. पिटकात एखादी गोष्ट आली आहे, म्हणून विश्वास ठेऊ नका", असं म्हणाले बुद्ध. 

जगातला एक धर्म सांगा, एक धर्मसंस्थापक सांगा, की जो स्वतःची अशी स्वतःच चिरफाड करतो! चिकित्सेची तयारी दाखवतो! 
'भक्त' वाढत चाललेले असताना, विखार ही मातृभाषा होत असताना आणि 'व्हाट्सॲप फॉरवर्ड' हेच ज्ञान झालेलं असताना बुद्धांचा हा दृष्टिकोन आणखी समकालीन महत्त्वाचा वाटू लागतो. 
माणूस बदलतो, यावर बुद्ध विश्वास ठेवतात. कोणीही मानव बुद्ध होऊ शकतो, याची हमी देतात. मात्र, स्वतःला शरण जा, हीच पूर्वअट  काजळी एवढी चढते की, आपण आपल्यालाच अंधारकोठडीत ढकलून देतो.    
  By
डॉ. घपेश पुंडलिकराव ढवळे नागपुर
      M. 8600044560
      ghapesh84@gmail.com

अमेज़न के आदिवासियों का प्रोटेस्ट

अमेज़न के कायापो (kayapo) आदिवासी समुदाय के लोग ब्राज़ील की सड़कों पर अपनी पारंपरिक पोषक पहन कर और हाथों में तीर-धनुष लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं।

प्रोटेस्ट का कारण क्या है?

पहला कारण है - अमेज़न के जंगलों में इन आदिवासियों के बीच कोरोना वायरस का अनियंत्रित रूप से फैलना और जेयर बोल्शेनारो सरकार की ओर से किसी भी तरह की मदद नहीं मिलना।

दूसरा कारण है - बोल्शेनारो की नीतियों की वजह से अमेज़न के जंगलों का सफाया किया जाना, जिसकी वजह से इन आदिवासियों का अस्तित्व बहुत बड़े संकट में पड़ गया है।

ये वही बोल्शेनारो है जिसने राष्ट्रपति का चुनाव जीतते ही अमेजन के जंगलों से आदिवासियों के अधिकारों को पूर्णतः खत्म करने का प्रण लिया था और घोषणा की थी कि अमेज़न के जंगलों और उसकी भूमि का इस्तेमाल ब्राज़ील के विकास के लिए व्यावसायिक तौर पर किया जाएगा।

सर्वज्ञात है कि जेयर बोल्शेनारो शुद्ध दक्षिणपंथी व्यक्ति है। इसकी पूंजीपतियों से गहरी सांठगांठ है। इसलिए पूंजीपतियों की तिजोरियाँ भरने के लिए ये व्यक्ति आदिवासियों की बलि चढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्राज़ील के आदिवासी इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तो राइट विंग सरकार की डी-फोरेस्टेशन संबंधी नीतियों की वजह से और दूसरा कोरोना महामारी की वजह से।

कोरोना से अभी तक 21 हजार से अधिक आदिवासी इन्फेक्टेड हो चुके हैं और 618 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

पूरा ब्राज़ील दुनिया में सबसे अधिक कोरोना केसेस वाले देशों में से एक है।

ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि जिन देशों में जितनी अधिक तानाशाही है वहाँ कोरोना का उतना ही अधिक भयावह रूप दिखाई पड़ रहा है। 

उसमें भी आदिवासी जनता पर सबसे अधिक कहर बरस रहा है। क्योंकि ये पूँजीवादी दुमछल्ले वैसे ही आदिवासी जनता को मुनाफे के ख़ातिर खत्म करने पर तुले हुए हैं, ऊपर से आदिवासियों के सफाए के लिए कोरोना वायरस इनके लिए अवसर बनकर आया है।   

By 
डॉ. घपेश पुंडलिकराव ढवळे नागपुर
      M. 8600044560
      ghapesh 84@gmail.com

Friday, July 17, 2020

** MISSION ADMISSION ** बारावी नंतर काय विद्यार्थ्यांसाठी खास पोस्ट........!


 

*मेडीकल* प्रवेशासाठी लागणारी  कागदपत्रे
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1) *नीट* आँनलाईन *फाँर्म* प्रिंट
2) *नीटप्रवेश* पत्र 
3) *नीट मार्क* लिस्ट
4)10 वी चा मार्क मेमो
5)10 वी सनद
6) 12वी मार्क मेमो
7) नँशनँलीटी सर्टीफिकेट
8 रहिवाशी प्रमाणपत्र
9)12 वी टी सी
10) मेडिकल सर्टिफिकेट फिटनेस
11) आधार कार्ड
12) उत्पन्न प्रमाणपत्र किंवा फाँर्म नं 16 वडिलांचा
13) मुलाचे राष्ट्रीय बँकेतील खाते
14) मुलाचे तसेच आई व वडिलांचे दोघांचे पँन कार्ड
मागासवर्गीयांसाठीवरील सर्व व खालील प्रमाणपत्रे
1) जातीचे प्रमाणपत्र
2) जात वैधता प्रमाणपत्र
3) नाँन क्रिमीलीयर प्रमाणपत्र 
( मागील काढलेले असेल तर 31 मार्च2021 पर्यत लागू)
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कृपया वरील कागदपत्रे अपुर्ण असतील तर त्वरीत पुर्ण करून घ्यावे.
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👉🏿 *इंजिनीअरिंग* प्रवेशासाठी लागणारी कागदपत्रे👈🏿
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1) *MHT-CET* आँनलाईन *फाँर्म* प्रिंट
2) MHT-CET* पत्र 
3) MHT-CET* मार्क  लिस्ट
4)10 वी चा मार्क मेमो
5)10 वी सनद
6) 12वी मार्क मेमो
7) नँशनँलीटी सर्टीफिकेट
8 ) रहिवाशी प्रमाणपत्र
9)12 वी टी सी
10) आधार कार्ड
11) उत्पन्न प्रमाणपत्र किंवा फाँर्म नं 16 वडिलांचा
12) राष्ट्रीय बँकेतील खाते                                         13) फोटो.

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*मागासवर्गीयांसाठीवरील सर्व व खालील प्रमाणपत्रे*
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1) जातीचे प्रमाणपत्र
2) जात वैधता प्रमाणपत्र
3) नाँन क्रिमीलीयर प्रमाणपत्र 
( मागील काढलेले असेल तर 31 मार्च2021 पर्यत लागू)

कृपया वरील कागदपत्रे अपुर्ण असतील तर त्वरीत पुर्ण करून घ्यावे
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*वैद्यकीय क्षेत्र* 
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*शिक्षण - एमबीबीएस*  
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र आणि NEETप्रवेश परीक्षा 
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी 
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पुढील उच्च शिक्षण - एमडी, एमएस व इतर पदविका 
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*शिक्षण - बीएएमएस* 
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी 
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पुढील उच्च शिक्षण - एमडी, एमएस व इतर पदविका 
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*शिक्षण - बीएचएमएस* 
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी 
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पुढील उच्च शिक्षण - एमडी 
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*शिक्षण - बीयूएमएस* 
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी.
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पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण 
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*शिक्षण - बीडीएस* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी 
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पुढील उच्च शिक्षण - एमडीएस 
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*शिक्षण - बीएससी इन नर्सिंग* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र NEET
संधी कोठे? - रुग्णालयात नर्स म्हणून नोकरी .
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पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण 
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*शिक्षण - बीव्हीएससी ऍण्ड एएच* 
कालावधी - पाच वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र NEET
संधी कोठे? - प्राणी, जनावर रुग्णालयात नोकरी, प्राणी संग्रहालय, अभयारण्यात नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय 
पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण 

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*शिक्षण - डिफार्म* 
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कालावधी - तीन वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, थेट प्रवेश 
संधी कोठे? - औषधनिर्मिती कारखान्यात नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय.
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पुढील उच्च शिक्षण - बीफार्म 
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*शिक्षण - बीफार्म* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, सीईटी 
संधी कोठे? - औषध कंपनी किंवा औषध संशोधन संस्था इत्यादी ठिकाणी नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय, नागरी सेवा परीक्षा 
पुढील उच्च शिक्षण - एमफार्म 
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संरक्षण दलांत प्रवेशासाठी 
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केंद्रीय लोकसेवा आयोगामार्फत (यूपीएससी) वर्षातून एनडीए (एक) व एनडीए (दोन) अशा दोन वेळा लेखी परीक्षा होतात. 
एअर फोर्स व नेव्हीसाठी जे उमेदवार राज्य शिक्षण मंडळाची किंवा मान्यताप्राप्त विद्यापीठाची बारावी परीक्षा भौतिकशास्त्र व गणित या विषयांसह उत्तीर्ण आहेत किंवा त्या परीक्षेस बसलेले आहेत, असे उमेदवार परीक्षेसाठी पात्र ठरतात. 
वयोमर्यादा : साडेसोळा ते 19 वर्षांदरम्यान वय असलेले उमेदवार अर्ज करू शकतात.
 
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*अभियांत्रिकी व ऑटोमोबाईल*
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*शिक्षण - इंजिनिअरिंग डिप्लोमा* 
कालावधी - तीन वर्षे 
पात्रता व प्रवेश परीक्षा - बारावी शास्त्र, थेट दुसऱ्या वर्गात प्रवेश 
संधी कोठे? - आयटी औद्योगिक क्षेत्रात, उद्योग किंवा व्यवसाय, स्वयंरोजगार 
पुढील उच्च शिक्षण - बीईच्या दुसऱ्या वर्षात प्रवेश 
*शिक्षण - बीई* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, सीईटी 
संधी कोठे? - स्वतःचा व्यवसाय, आयटी, औद्योगिक क्षेत्र, संशोधन संस्था, नागरी सेवा परीक्षा, अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 
पुढील उच्च शिक्षण - एमई, एमटेक, एमबीए; तसेच जीआरई देऊन परदेशात एमएस 
*शिक्षण - बीटेक* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, आयआयटी जेईई, एआयईईई 
संधी कोठे? - औद्योगिक क्षेत्र, सरकारी उद्योग, खासगी उद्योग, संशोधन संस्था, आयटी क्षेत्र, नागरी सेवा व अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार 
पुढील उच्च शिक्षण - एमई, एमटेक, एमबीए किंवा जीआरई देऊन परदेशात एमएस 
शिक्षण - ऑटोमोबाईल अभियांत्रिकी पदवी - 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता - बारावी शास्त्र, सीईटी 
शिक्षण - ऑटोमोबाईल अभियांत्रिकी पदव्युत्तर शिक्षण 
कालावधी - दोन वर्षे 
पात्रता - बीई, ऑटोमोबाईल, मॅकेनिकल, उत्पादन, तत्सम शिक्षण 
बारावी नंतर काय विद्यार्थ्यांसाठी खास पोस्ट...................!* 


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 *कॉम्प्युटरमधील कोर्सेस* 
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डीओईएसीसी "ओ' लेव्हल 
कालावधी - एक वर्ष ऊजएअउउ 
डिप्लोमा इन ऍडव्हान्स्ड सॉफ्टवेअर टेक्‍नॉलॉजी 
कालावधी - दोन वर्षे 
सर्टिफिकेट कोर्स इन इन्फर्मेशन टेक्‍नॉलॉजी 
कालावधी - सहा महिने 
सर्टिफिकेट इन कॉम्प्युटर ऍप्लिकेशन 
कालावधी - तीन महिने 
सर्टिफिकेट इन कॉम्प्युटिंग 
कालावधी - दहा महिने 
इग्नू युनिव्हर्सिटी 
सर्टिफिकेट कोर्स इन कॉम्प्युटर प्रोग्रॅमिंग 
कालावधी - एक वर्ष 
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*शिक्षण - बारावी*
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*शास्त्र कॉम्प्युटर ऍप्लिकेशन* 
कालावधी - एक वर्ष 
वेब डिझाईनिंग ऍण्ड वेब डेव्हलपमेंट 
कालावधी - दोन महिने 
कॉम्प्युटर ऑपरेटर ऍण्ड प्रोग्रॅम असिस्टन्स 
कालावधी - एक वर्ष 
(फक्त मुलींसाठी) 
डिप्लोमा इन ऍडव्हर्टायझिंग ऍण्ड ग्राफिक डिझाईनिंग 
कालावधी - दोन वर्षे 
गेम डिझाईन ऍण्ड डेव्हलपमेंट 
कालावधी - एक वर्ष 
प्रिंट इमेजिंग ऍण्ड पब्लिशिंग, कार्टून ऍनिमेशन, ई-कॉम डेव्हलपमेंट, वेब ग्राफिक्‍स ऍण्ड ऍनिमेशन 
कालावधी - एक वर्ष 
कॉम्प्युटर ऑपरेटर ऍण्ड प्रोग्रॅमिंग असिस्टंट 
कालावधी - एक वर्ष 
डेस्क टॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर 
कालावधी - एक वर्ष 
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 *रोजगाराभिमुख कोर्सेस*
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*शिक्षण - डिप्लोमा इन प्लॅस्टिक मोल्ड टेक्‍नॉलॉजी* 
कालावधी - तीन वर्षे 
पात्रता - बारावी (70 टक्के) 
संधी कोठे? - प्लॅस्टिक आणि मोल्ड 
इंडस्ट्रीमध्ये संधी, सिंगापूर, मलेशियामध्ये संधी 
उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण 
कोठे? सेंट्रल इन्स्टिट्यूशन ऑफ प्लॅस्टिक्‍स 
इंजिनिअरिंग ऍण्ड टेक्‍नॉलॉजी, म्हैसूर 
*शिक्षण - टूल ऍण्ड डाय मेकिंग* 
कालावधी - चार वर्षे 
पात्रता - दहावी आणि बारावी पास 
संधी - टूल ऍण्ड डाय इंडस्ट्री, भारत आणि मलेशियाशियामध्ये भरपूर संधी गव्हर्नमेंट टूल रूम ऍण्ड ट्रेनिंग सेंटर 
(जीटीटीसी), नेट्टूर टेक्‍नॉलॉजी ट्रेनिंग 
फाउंडेशन (एनटीटीएफ) 
सेक्रेटरीअल प्रॅक्‍टिस 
कालावधी - एक वर्ष 
फॅशन टेक्‍नॉलॉजी 
कालावधी - एक वर्ष 
मॉडर्न ऑफिस प्रॅक्‍टिस 
कालावधी - तीन वर्षे 

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*हॉस्पिटॅलिटी ऍण्ड टुरिझम*
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*टूरिस्ट गाइड* 
कालावधी - सहा महिने 
डिप्लोमा इन फूड ऍण्ड बेव्हरेज सर्व्हिस 
कालावधी - दीड वर्ष 
बेसिक कोर्स ऑन ट्रॅव्हल फेअर ऍण्ड टिकेटिंग 
कालावधी - तीन महिने 
बेसिक कोर्स इन कॉम्प्युटराइज्ड रिझर्व्हेशन 
सिस्टम (एअर टिकेटिंग) 
कालावधी - एक महिना 
अप्रेन्टाईसशिप 
कालावधी - पाच महिने ते चार वर्षे 
*शिक्षण - व्होकेशनल स्ट्रिममध्ये बारावी* 
डिजिटल फोटोग्राफी 
कालावधी - एक वर्ष 
स्टोअर कीपिंग ऍण्ड पर्चेसिंग 
कालावधी - एक ते तीन वर्षे 
सेल्स ऍण्ड अकाउंटन्सी 
कालावधी - एक ते तीन वर्षे.
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*बांधकाम व्यवसाय*
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*शिक्षण - बीआर्च* 
कालावधी - पाच वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र,NATA , JEE
संधी कोठे? - स्वतःचा व्यवसाय किंवा बांधकाम उद्योगांमध्ये नोकरी, नागरी सेवा परीक्षा 
पुढील उच्च शिक्षण - एमआर्च, एमटेक  
*पारंपरिक कोर्सेस*
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*शिक्षण - बीएससी* 
कालावधी - तीन वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, प्रवेश थेट 
संधी कोठे? - आयटी, औद्योगिक क्षेत्र, संशोधन संस्था, नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार 
पुढील उच्च शिक्षण - एमएससी, एमबीए, एमसीए, एमपीएम इत्यादी.
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*शिक्षण - बीएससी(Agri)* 
कालावधी - 4 वर्षे 
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र व CET
संधी कोठे? - कृषी उद्योग कारखान्यात नोकरी, सरकारी कृषी सेवा नोकरी, नागरी सेवा परीक्षा, शेती व्यवसाय 
पुढील उच्च शिक्षण - एमएससी (ऍग्रो), राष्ट्रीय कृषी परिषद संस्थांमध्ये संशोधन 
--By 
*शिक्षण - बीए* 
कालावधी - तीन वर्षे 
संधी कोठे? - नोकरीसाठी व्यावसायिक, मृदू कौशल्ये, प्रमाणपत्र अथवा पदविका अभ्यासक्रम बीए करतेवेळी जास्त फायदेशीर. नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार 
पुढील शिक्षण - एमए, एमबीए, पत्रकारिता, पदविका, एलएलबी
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*शिक्षण - बीकॉम* 
कालावधी - तीन वर्षे 
संधी कोठे? - आयसीडब्ल्यूए, सीए, सीएस परीक्षांचा अभ्यास बीकॉम करताना देणे फायदेशीर, नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार, लेखापाल म्हणून नोकरी 
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*शिक्षण - बीएसएल* 
कालावधी - पाच वर्षे 
संधी कोठे? - विधी व्यवसाय, विधी सल्लागार, नागरी सेवा परीक्षा, न्याय सेवा 
पुढील उच्च शिक्षण - एलएलएम 
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*शिक्षण - डीएड* 
कालावधी - दोन वर्षे 
प्रवेश - सीईटी आवश्‍यक 
संधी कोठे? - प्राथमिक शिक्षण शिक्षक 
पुढील उच्च शिक्षण - बीए, बीकॉम व नंतर बीएड 
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*शिक्षण - बीबीए,* बीसीए,बीबीएम 
कालावधी - तीन वर्षे 
प्रवेश - सीईटी 
संधी कोठे? - औद्योगिक क्षेत्रात नोकरी, आयटी क्षेत्रात नोकरी, स्वयंरोजगार, नागरी सेवा परीक्षा 
पुढील उच्च शिक्षण - एमबीए, एमपीएम, एमसीए  

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*फॉरेन लॅंग्वेज* 
(जर्मन, फ्रेंच, रशियन, स्पॅनिश, चायनीज, 
जॅपनीज, कोरियन) 
कालावधी ः बेसिक, सर्टिफिकेट किंवा इतर 
कोर्सेसवर आधारित
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 *फॉर्म भरताना हे लक्षात ठेवा.......*
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अर्ज भरायला जाताना मार्कलिस्ट, जातीचा दाखला, नागरिकत्व, आधार कार्ड आणि घराच्या पत्त्याच्या पुराव्याची अटेस्टेड कॉपी न्यायला विसरू नका. 
पासपोर्ट आकाराचा फोटो, डिंक, त्याचबरोबर कागदपत्रे जोडण्यासाठी स्टेपलर जवळ ठेवा. 
विद्यार्थ्यांचे नाव, पत्ता, ई-मेल, नागरिकत्व, जन्मतारीख, जन्मस्थळ इत्यादीची माहिती अर्जात दिलेल्या पद्धतीनेच भरावी. उदा.- आडनाव, पालकांचे नाव, स्वतःचे नाव योग्य रकान्यातच लिहावे. इंग्रजीमध्ये अर्ज भरल्यास तो कॅपिटल लेटरमध्ये भरावा. 

अर्ज चुकू नये म्हणून सुरवातीला त्याच्या झेरॉक्‍सवर माहिती भरा. त्यानंतर अर्जात ती माहिती भरा. एखादा मुद्दा न कळल्यास मार्गदर्शन घ्या. 

अर्ज भरायच्या तारखा आणि वेळापत्रकाचे कसोशीने पालन करा. 

इतर क्षेत्रांमध्ये मिळवलेल्या प्रमाणपत्रांच्या अटेस्टेड कॉपी बरोबर ठेवा. 

काही महाविद्यालयांमध्ये प्रश्‍नावली भरावी लागते. त्यामध्ये तुम्हाला याच महाविद्यालयामध्ये प्रवेश का हवा, ठराविकच शाखा का, रोल मॉडेल कोण, करिक्‍युलर ऍक्‍टिव्हिटीजबाबत अनेक प्रश्‍न असतात. अशा प्रश्‍नांवरील उत्तरांचा आधीच विचार करून ठेवा. 
बऱ्याच वेळेला ऑनलाइन अर्जप्रक्रिया पूर्ण करायच्या असतात. त्यासाठी संबंधित कागदपत्रे स्कॅन करा. ते पेनड्राइव्हवर सेव्ह करून ठेवा आणि तो आपल्या जवळ बाळगा. 
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*काही महत्त्वाची संकेतस्थळे*
 
1) तंत्रशिक्षण संचालनालय, महाराष्ट्र शासन. 
(अभियांत्रिकी, वास्तुशास्त्र, औषधनिर्माण शास्त्र, हॉटेल मॅनेजमेंट आदी) 
www.dte.org.in 
2) वैद्यकीय शिक्षण आणि संशोधन संचालनालय, महाराष्ट्र शासन (वैद्यकीय शिक्षणासंबंधी) 
www.dmer.org
3) व्यवसाय शिक्षण व प्रशिक्षण संचालनालय, महाराष्ट्र शासन (औद्योगिक प्रशिक्षणासाठी) 
www.dvet.gov.in
4) पारंपरिक पदवी शिक्षण, पुणे विद्यापीठ 
www.unipune.ac.in
5) भारतीय प्रौद्योगिक संस्था (आयआयटी), मुंबई 
आयआयटी, जेईईसंबंधी (बी. टेक पदवी) 
www.iitb.ac.in 
6) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षण मंडळ (सीबीएसई) "एआयईईई‘संबंधी अभियांत्रिकी शिक्षण 
www.aipmt.nic.in 
7) एनडीए प्रवेश परीक्षेणसंबंधी केंद्रीय लोकसेवा आयोगय (यूपीएससी) 
www.upsc.gov.in वरील माहिती आपल्या मित्र,नातेवाईक,पाल्य,विद्यार्थी, यांना पाठवा.
🙏🏻👍
By 
       Dr.Ghapesh Pundalikrao Dhawale Nagpur
            ghapesh84@gmail.com
            8600044560
सोंजंन्य
     AIDSO

वात्सववादी साहित्यीक अन्ना भाऊ..

तुकाराम भाऊराव साठे म्हणजेच आण्णा भाऊ साठे यांचा जन्म (१ ऑगस्ट १९२० - १८ जुलै १९६९) सांगली जिल्ह्यात वाळवा तालुक्यात वाटेगाव या गावी झाला. अण्णाभाऊ शाळेत शिकले नाहीत. ते केवळ दीड दिवस शाळेत गेले होते. मात्र शाळेत शिक्षकांकडून होणारी मारहाण, अपमानास्पद वागणूक यामुळे त्यांनी शाळा सोडून दिली. ते परत शाळेत गेलेच नाही. लहानपणीच  त्यांना जातिव्यवस्थेचे चटके सोसावे लागले. पोटापाण्यासाठी त्यांनी चालतच मुंबई गाठली. मुंबईत असताना चळवळींशी त्यांचा संबंध आला. दत्ता गवाणकर आणि अमर शेख या शाहिरांसोबत त्यांनी 'लाल बावटा' हे कला पथक स्थापन केले. संयुक्त महाराष्ट्र चळवळीत त्यांचा सक्रिय सहभाग होता. त्यासोबतच अनेक कथा, कादंबऱ्या, पोवाडे त्यांनी सामाजिक आणि राजकीय परिस्थितीशी जोडत लिहिले. त्यांची गाजलेली कादंबरी म्हणजे 'फकीरा' होय. त्यांच्या साहित्यात जगण्याचा संघर्ष होता, स्वतः अनुभवलेलं आयुष्य त्यांनी आपल्या साहित्यातून मांडले. त्यांनी लिखाणातून चित्रा, वैजंता अशा सशक्त नायिका उभ्या केल्या. पहिल्या दलित साहित्य संमेलनाचे उद्घाटन त्यांच्या हस्ते झाले, त्यात त्यांनी उच्चारलेले वाक्य होते, "ही पृथ्वी श्रमिक आणि दलितांच्या तळहातावर तरलेली आहे". आचार्य अत्रे यांनी म्हटलं होतं, जगण्यासाठी मरणाऱ्या माणसांची कथा अण्णाभाऊंनी लिहिली.  
लोकशाहीर आण्णा भाऊ साठेंना स्मृतिदिनी विनम्र अभिवादन!

By 
Dr Ghapesh Dhawale Nagpur
      ghapesh84@gmail.com
       M. 8600044560

Wednesday, July 15, 2020

स्वातंत्र लढ्यातील योद्धा..

भारताच्या स्वातंत्र्यलढ्याच्या चळवळीत अनेकांचेविशेषकरून
 महिलांचे  योगदान पडदद्यामगे गेलेले दिसते. त्यातलेच एक नाव म्हणजे अरूणा असफ अली होय. यांचा भारताच्या स्वातंत्र्य चळवळीत विशेषकरून १९४२ च्या भारत छोडो आंदोलनात सक्रिय सहभाग होता. त्यांचे व्यक्तीमत्व झुजारू आणि प्रेरणा देणारे आहे. ज्या उर्मीने त्यांनी आपला जीवनकाळ समाजासाठी काम करण्यात घालवला होता. त्याकाळात जे चुकीचे वाटले त्याविरोधात त्या बोलल्या जसे की १९३२ मधे तिहार जेलमध्ये असताना त्यांनी राजकीय कैद्यांना मिळणाऱ्या भेदभावाच्या विरोधात 'हंगर स्ट्राईक' केली होती. अरूणा यांचा जन्म एका ब्राम्हो कुटुंबात झाला होता. वैयक्तीक आयुष्यातही त्यांनी बंड केले. त्यांनी जाती- धर्माची बंधने तोडून घरच्यांचा विरोध असतानाही असफ अली यांच्याशी लग्न केले. त्यांचे सामाजिक आणि वैयक्तिक आयुष्य एकमेकांशी सुसंगत आणि सुसंवादी होते. आज आपल्यापैकी किती जणांचे आयुष्य असे सुसंगत असते हे ज्यानी-त्यानी स्वतःला विचारण्याजोगा प्रश्न आहे. जस उदाहरण द्यायचे झाले तर अनेकजण फक्त म्हणतात कि मी हुंड्याच्या विरोधात आहे पण प्रत्यक्षात वेगळ्या स्वरूपात हुंडा घेऊन लग्न करताना दिसतात. दुसरे उदाहरण म्हणजे अनेकजण म्हणतात कि आम्ही जातीवरून भेदभाव करत नाही मात्र त्यांच्या प्रत्यक्ष कृतीत जातीतच लग्न केलेले दिसते. हे बदलायची गरज आहे. अरूणा यांनी या सुसंगतपणाचे मर्म जाणले होते. पुढे त्या कॉग्रेस पार्टीच्या मेंबर झाल्या होत्या. १९४२ च्या आंदोलनात जेव्हा कॉंग्रेसच्या प्रमुख नेत्यांना इंग्रज सरकारने अटक केली होती तेव्हा पुढाकार घेवून त्यांनी भारत छोडो आंदोलनाचा समारोप केला होता. यावरून त्यांच्यातील नेतृत्व कौशल्य दिसते. त्यांना भारताच्या स्वातंत्र्य लढ्यातील "ग्रॅंड ओल्ड लेडी" म्हणून ओळखले जाते. त्यांच्याकडून प्रेरणा घेवून आजच्या प्रश्नावर आपण बोलले पाहिजे, लढले पाहिजे. आत्ताचा ताजा मुद्दा म्हणजे नागरिकत्वसंशोधन विधेयकाविरोधात शांतीपूर्ण आणि संवैधानिक मार्गाने काम करणाऱ्या विद्यार्थी आणि आंदोलकांना खोट्या केसेस मधे फसवून जे अटकसत्र सरकारने चालवले आहे त्याचा विरोध आपण सर्वांनी मिळून केला पाहिजे. तरच भारताच्या स्वातंत्र्य लढ्यातील अनेकांचे योगदान सार्थक होइल आणि संविधानाच्या रूपाने स्वातंत्र्य लढ्यातून जन्म घेतलेल्या बंधुता, जगण्याचा हक्क, विरोध करण्याचा अधिकार, अभिव्यक्ती स्वातंत्र्य यांची गळचेपी होउ न देता त्यांचे संवर्धन करण्याची जबाबदारी प्रत्येक भारतीय नागरीकाची आहे. यासाठी प्रेरण्या देणाऱ्या झुझारू, लढाऊ नेतृत्व असणाऱ्या अरुणा असफ अली यांना विनम्र अभिवादन!

#ArunaAsafAli #FreedomStruggle #

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Dr Ghapesh Pundalikrao Dhawale,
      ghapesh84@gmaul.com
      M. 8600044560